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रेलवे का निर्माण: केवल राजस्व भूमिसे ही नहीं, वनजमीन से भी हो रही है अवैध मुरुम खुदाई

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गडचिरोलीता.15 : वडसा-गडचिरोली रेलवे के लिए राजस्व भूमि से अवैध मुरुम खुदाई का मामला ताजा ही है, उधर वन भूमि से लाखो ब्रास मुरुम की अवैध खुदाई होने की नई बात सामने आयी है. वनविभाग के कठोर नियमों का उल्लंघन करने के कारण संबंधित कंपनी से जुर्माना वसूल करने और क्षेत्र सहायक व वनरक्षक को तुरंत निलंबित करने की मांग खांबाला ग्रामपंचायत के पूर्व सरपंच एवं सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शेडमाके ने वनसंरक्षक से की है.

नंदकिशोर शेडमाके ने वनसंरक्षक को दिए ज्ञापन में कहा है कि, जेपी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने वन विभाग की जमीन से अवैध रूप से मुरुम की खुदाई की है. उन्होंने उत्खनन स्थलों की तस्वीरें भी संलग्न की हैं. पिछले कुछ महिनों से वडसा-गडचिरोली रेलवे लाइन का काम चल रहा है. इसके लिए पोर्ला वन परिक्षेत्र के पोर्लावसावसा चक और अन्य गावों के वन विभाग की भूमि से 10 पोकलैंड और 30 हायवा के माध्यम से हर दिन और रात हजारों ब्रास मुरुम का अवैध रूप से खनन किया जा रहा है. शेडमाके ने कहा कि, इस तथ्य के बावजूद कि रेलवे के काम में शामिल कंपनी के पास मुरुम खोदने की कोई कानूनी अनुमति नहीं थीखुदाई जोरों से चल रही है.

अब तक पोर्ला वनपरिक्षेत्र में लाखों ब्रास मुरुम अवैध खनन के कारण बड़े गड्ढे खोदे जा चुके हैं. चूरमुराकिटाली आदि स्थानों पर पूर्व मालगुजारी तालाबों से लाखों ब्रास मुरुम और मिट्टी भी अवैध रूप से निकाली गई है. इससे तालाबो में बड़े गड्ढे बन गए हैं. हाल ही में किटाली की 50 वर्षीय लोभा मंगरे नामक महिला की गड्ढे में डूबने से मृत्यु हो गई. खनन से जो बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैंउसमे बाघ, हाथी, हिरण और अन्य महत्वपूर्ण जानवरों के डूबने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. इसके अलावाउत्खनन के दौरान बड़ी मात्रा में जैव विविधता नष्ट हो गई हैबिजली के खंभे छोडकर खनन किया गया. लेकिन भारी मात्रा में वर्षा होने से यह खंबे गिरकर जानलेवा साबित हो सकते है.

रेलगाड़ी की पटरियों के लिए तैयार किए गए रैंप के दोनों तरफ से ९ मीटर से अधिक चौडी सड़कें बनाई गई हैं. इन सड़कों का निर्माण करते समय बड़े-बड़े पेड़ काटे गए हैं. विशेष रूप से, वनविभाग ने तैयार की गई फेंसिंग तोड़कर सड़कें बनाई गईं. फिर जेसीबी की सहायता से मिट्टी डालकर उन्हें भर दिया गया. जंगल में टीसीएम की नालियों को नहीं तोड़ा जा सकता. लेकिन इन नालियों को तोड़कर नियम के खिलाफ सड़कें बनाई गईं. क्या जंगल में किसी कंपनी को बिना अनुमति के अंदरूनी सड़कें बनाने की अनुमति मिल सकती है? इस सवाल को भी शेडमाके ने उठाया है.

वन विभाग के सख्त कानूनों के बावजूद क्षेत्र सहायक और वनरक्षक की मिलीभगत से रेल्वे मार्ग का काम करने वाली कंपनी ने अवैध रूप से लाखों ब्रास मुरुम खनन किया है. इससे वन विभाग का करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. जंगल में वन्यप्राणियों के चलने-फिरने के रास्ते भी उन्होंने अस्त-व्यस्त कर दिए हैं.

सीलिए पोर्ला वनपरिक्षेत्र में क्षेत्रसहायक अरुण गेडाम और वनरक्षक की जांच कर उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए, साथ ही संबंधित कंपनी पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए. अगर कार्रवाई नहीं की गई तो 26 मई से आदिवासी संगठन के माध्यम से अनिश्चित कालीन धरने का आयोजन किया जाएगा, सी चेतावनी भी नंदकिशोर शेडमाके ने दी है.

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