नंदकिशोर वैरागड़े/कोरची, ता. २१: खाते में पैसे तो हैं, लेकिन वृद्धावस्था के कारण बैंक नहीं जा सकती। किसी और व्यक्ति को पैसे निकालने के लिए भेजो तो बैंक के नियम बाधा बनते हैं। ऐसी मुश्किल में फंसी सौं साल की वृद्धा को बैंक प्रबंधक ने १७ किलोमीटर का सफर तय कर उसके घर जाकर पैसे दिए। मानवता का यह जीवंत उदाहरण आज कोरची तालुका में देखने को मिला।
कोरची तहसील एक आदिवासीबहुल, अत्यंत दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। तालुका मुख्यालय से १७ किलोमीटर दूर कैमूल नामक गाँव है। इस गाँव में उम्र के सौ साल पार कर चुकी अमाई अर्जुन मेश्राम नाम की वृद्ध महिला रहती हैं। आधार कार्ड के अनुसार अमाई की उम्र सौ वर्ष है, लेकिन परिवार वालों का कहना है कि वह वास्तव में ११० या ११२ वर्ष की हो सकती हैं। अमाई का कोरची स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में खाता है। इस खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और निराधार योजना के पैसे जमा होते हैं। फिलहाल उनके खाते में २७,४४७ रुपये जमा हैं। अमाई को इन पैसों की जरूरत थी, लेकिन वृद्धावस्था के कारण वह घर से बाहर नहीं निकल सकतीं। १७ किलोमीटर दूर बैंक जाकर पैसे निकालना नामुमकिन था। बैंक पैसे तभी देती है जब खातेधारक स्वयं उपस्थित हो। यदि किसी और को पैसे निकालने के लिए भेजा जाए तो बैंक के नियम बाधा बन जाते हैं। इसलिए पैसे निकालने के तरीके को लेकर परिवार वाले चिंतित थे।
यह बात एक व्यक्ति ने कोरची में बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक मनोज नंदेश्वर के कानों तक पहुंचाई। वृद्ध महिला की कठिनाइयों को सुनकर नंदेश्वर का दिल पिघल गया। उन्होंने उसकी मदद करने का निश्चय किया। लेकिन क्या करें, यह समझ नहीं आ रहा था। एक ओर वृद्ध महिला की समस्या, तो दूसरी ओर बैंक के नियम, ऐसी दुविधा में प्रबंधक फंसे हुए थे। नंदेश्वर ने कैमूल गांव में अमाई के घर जाकर उसे राशि देने का फैसला किया। प्रबंधक के इस निर्णय को देखकर बैंक के कर्मचारी हैरान रह गए। अंततः सभी औपचारिकताएं पूरी कर आज तेज धूप में प्रबंधक नंदेश्वर कैमूल गांव पहुंचे। गांव में अमाई के घर का पता लगाया। प्रबंधक को दरवाजे पर देखकर अमाई अचम्भित रह गई। उसके रिश्तेदार और गांव वाले भी भावुक हो उठे। नंदेश्वर ने आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर अमाई के खाते से दस हजार रुपये उसको दिए। उर्वरित राशी कल रिश्तेदारोंको सौंप दी जायेगी.
नंदेश्वर वृद्ध महिला की मदद को दौड़े ही; लेकिन ‘रिश्तों की जमापूंजी’ इस बैंक ऑफ इंडिया के नारे से भी नागरिकों को सच्चाई से परिचित होने का मौका मिला, यह भी कम नहीं था।




